मंगलवार, फ़रवरी 07, 2012

कुछ याद आया ???


जी हाँ! यह ताऊ जी यानि सैन्नी अशेष ही हैं। मनाली के राम बाग़ में ठीक इस फोटो क्लिक से पहले खाए चनो का चटोरा पन अब तक होंठो पर चिपक रहा है।

अग्निपथ... अग्निपथ...अग्निपथ...


...उन्होंने हिमाचल की पत्रकारिता में अपना एक अलग मुहावरा विकसित किया। समाचार पत्रों के बीहड़ में एक संवाददाता के रूप में इस अग्निपथ पर चलकर संपादक तक का सफ़र तय कर वो आगे बढ़ चले हैं..एक सुबह हर बार की तरह गुरूरानी सर का फ़ोन आया की आज ख़ास खबर क्या है... खैर छोडो आज खबर मैं देता हूँ... दैनिक हिंदुस्तान में बतौर स्थानीय संपादक जोइनिंग के समाचार से एकाएक झटका सा लगा..चूँकि वह एक बॉस से ज्यादा एक सुलझे हुए इंसान के अलावा एक बड़े भाई की तरह हैं....आपको शुभकामनायें....

शुक्रवार, मार्च 27, 2009

kirayedar



उम्र भर
एक अजीब सी उपेक्षा सहता है वह
चारदीवारी के भीतर
मकान मालिक की तरह ही
रहता है
पर उसकी तरह
महसूस नही कर पाता
शान्ति भंग न हो जाए कहीं
आहिस्ता आहिस्ता
ठोंकता है दीवार पर कील
हर महीने की अन्तिम तारीख को
बढ़ जाता है तनाव
और फ़िर अदायगी के बाद
कुछ दिनों के लिए हो जाता है निश्चिंत
सुनहरे सपने देखता है कभी कभी
सोन मछलियाँ तैरती
उसके ड्राइंग रूम में
उसे भी हक़ है की वह सोचे
उसका भी हो अपना मकान
और वह भी ठोंक सके
बेसाख्ता अपनी दीवार में कील......
शशि भूषण पुरोहित